Monday, September 29, 2014

teliyakand

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http://the-hidden-sector.blogspot.in/2011/10/rare-and-miraculous-medicinal-plant.html
aridwar, 12 Oct. : The expert team working on medicinal plants and herbs from Patanjali Yogpeeth, under the able guidance of renowned Ayurvedacharya respected Acharya Balkrishan ji  discovered a rare divya medicinal plant in the vicinity of Uttrakhand, in dense Himalayan forest region of Garhwal. Acharya shri was in search of this rare medicinal plant since years and is very much satisfied with this discovery. In Ayurveda Shastra there is an elaborate description of various miraculous medicinal plants. 'Teliya Kand' (Sauromatum venosum) is among these miraculous plant which has been described in ancient Ayurvedic text and is discovered by only a few fortunate-people.

The discovery of this rare herb will be a milestone in the field of Ayurveda and an epic work undertaken by Patanjali Yogpeeth and its Research and Development Department for the compilation of Vishwa Bhesaj Samhita (World Herbal Encyclopaedia). Patanjali Yogpeeth has also discovered several medicinal plants including-Ashtavarga, Sanjivani etc in the past.

Ancient ayurvedic text, 'Raj Nighantu' quotes about this Teliya kand- "Taila kandh deha Siddihim Vidyatte" which means one can get perfection in the health. It is having strong aphrodisiac property. It is very much effective even in diseases like Cancer. Ancient Saints and Ayurveda experts think that it is having the property of binding mercury and can also convert Copper into Gold. Above described properties show that it is a divya and miraculous medicinal plant. Such rare medicinal plants require more exploration and scientific research. The team along with Acharya ji included Dr. Anupam Srivastava, Dr. Rajesh Mishra and others.




32 comments:

Dr. chandan baman said...
patanjali works on ayurveda is very good,now ayurveda is in strog hand,i have large quentity of this kanda but i not know this is teliya kand
Richy said...
Hello Sir, Teliya kand is found in uttrakhand... where are you from? Is teliya kand available in large quantity in your city?
Richy said...
If teliya kand is found in large quantity in your city then you should contact patanjali so that they can get this plant in good amount and start research...
dr chandan baman said...
We can coolect it in moonsoon only
Richy said...
ok sir, that's good information.. From which state do you belong?
dr.chandan said...
kerla
Richy said...
Ok sir, thanx.
Ramniwas Mahala said...
This comment has been removed by the author.
vicky said...
this is good one.
this one more article gives more details about teliya kand.

http://teliyakand2.blogspot.in/

The secret of telia kand
एक दिव्य औषधी तेलिया कंद zalakiratsinh@hotmail.com
Mo.9924344121
सृष्टिकर्त्ता ने प्रकृति रूपी प्रयोगशाला में औषधी रूपी रसायनों की उपस्थिति का अद्भुत सर्जन किया है । सुष्टा की इस रचना की एक प्रतिकृति अर्थात तेलिया कन्द, एक विलुप्त प्रायः वनस्पति यानि तेलिया कंन्द । सर्व प्रथम मुझे श्री नारायण दत्त श्रीमालीजी द्वारा लिखित पुस्तक में से तेलिया कन्द के विषय में विस्तृत ज्ञान प्राप्त हुआ । तत्पश्चात् मैने इस वनस्पति के विषय में अनुसन्धान कार्य प्रारम्भ किया । तेलिया कंद के विषय में अनेक भ्रामक किंवदन्तियाँ सुनने में आती है । किसी का मत है कि, तेलिया कन्द दुर्गम पहाड़ों के मध्य उत्पन्न होता है । तो कुछ लोग कहते है कि, तेलिया कन्द नाम की वनस्पति पृथ्वी से नामशेष हो गई है । इस प्रकार तेलिया कन्द क्या है, उसका वास्तविक प्राप्ति स्थान कहाँ है इस सन्दर्भ में लोग अन्धेरे में भटक रहे है । मेरे पन्द्रह वर्ष की तेलिया कन्द के विषय के अनुसन्धान के समय मुझे इस कन्द के विषय में अनेक कथन सुनने को मिले । एक महात्मा के बताने के अनुसार तेलिया कन्द लोहे को गला सकता है । एक लोहे के सरिये को लेकर जो उसे कंद के अन्दर डालकर थोड़े समय पश्चात बाहर निकालकर उसे मोड़ने पर वह आसानी से मुड़ जायेगा और कोई इसे जोगिया कन्द भी कहते है । लोग कहते है कि केन्सर के लिए यह कन्द अत्यन्त उपयोगी है । एक महात्मा के अनुसार हिमालय में साधु – महात्मा अपने शरीर की ठंड से रक्षा हेतु तेलिया कंद को चिलम में भर कर पीते है । इसके अतिरिक्त एक महात्मा ने तेलिया कन्द के द्वारा पारा एवं तांबे में से सोना (सुवर्ण) बनाया था । इसके अनेक उदाहरण हमें पढ़ने हेतु मिलते है । कई राज्यों में अनेक वनस्पतियों के मूल को लोग तेलिया कन्द नाम से जानते है । तो इस स्थिति में यहा निर्णय करना कठिन है कि वास्तविक तेलिया कंद कौन है । तो इस अनुसन्धान में यथोचित प्रयास किया है । मेरी जानकारी में इस कन्द के अनेक भाषाओं में नाम उल्लिखित है किन्तु गुरुदेव की अनुमति न होने से प्रकाशित नहीं कर सकता हूँ । प्राप्ति स्थानः- इसके प्राप्ति स्थान के विषय में किसी भी प्राचीन ग्रन्थ में उल्लेख प्राप्त नहीं होता है इसके नाम और गुणधर्मों का उल्लेख प्राप्त होता है । जैसे कि राजनिघण्टु में तेलिया कन्द का उल्लेख प्राप्त होता है- अर्शारि पत्र संकाशं तिल बिन्दु समन्वितः सस्निग्धारस्थ भूमिस्थ तिल कन्दोति विस्तृत। इसी प्रकार का उल्लेख रसेन्द्र चूड़ामणी में भी दृष्टिगत होता है-तिलकन्देति
kirat said...
page (2)
व्याख्याता तिलवत् पत्रीणी, लता क्षीरवती सुत निबंधनात्यातये खरे) । लोहद्रावीतैलकन्दं कटुष्णो वातापस्मार हारी विषारिः शोफध्नः स्याबन्धकारी रसस्य दागेवासो देहसिद्धि विद्यते । (निघण्टु भूषण) इस अतिरिक्त शब्दकल्पद्रुम के द्वितीय भाग के ८३ वें पृष्ठ पर इसका उल्लेख प्राप्त होता है । रशशास्त्र के एक ग्रन्थ सुवर्ण तंत्र (परमेश्वर परशुराम संवाद) नाम के एक ग्रन्थ में उल्लेख प्राप्त होता है कि, एक कमल कन्द जैसा कन्द होता है पानी में उत्पन्न होता है और जहाँ पर यह कन्द होता है उसमें से तेल स्रवित होकर निकटवर्ती दस फिट के घेरे में पानी के ऊपर फैला रहता है और उस कन्द के आस-पास भयंकर सर्प रहते है । इसके अतिरिक्त सामलसा गौर द्वारा लिखित जंगल की जंडी बूटी में भी पृष्ठ संख्या २२३ में भी इस कन्द का उल्लेख दृष्टिगोचर होता है। तेलिया कन्द के विषय में कहा जाता है कि यह कन्द विन्ध्याचल, आबु, गिरनार, अमरनाथ, नर्मदा नदी के किनारे, हिमालय, काश्मीर आदि स्थानों में प्राप्त होता है । मध्यभारत में छतींसगढ़, रांगाखार, भोपालपय्नम के पहाड़ों में तेलिया कन्द होतां है । उसके नाम से असके मूल बजार में बेचे जाते है । वहाँ के वृद्धों का ऐसा मत है कि जो तेलिया कन्द के रस में तांबा को गलाकर डालने पर वह(ताँबा) सोना बन जाता है । और यदि कोई व्यक्ति इस रस का सेवन करता है तो उसे बुढापा जन्दी नहीं आता है । पूज्य श्रीमालीजी ने भी इस बात का उल्लेख अपनी पुस्तक में किया है । भारतवर्ष के वे ऋषि-गण धन्य है जिन्हों ने देश को ऐसा दिव्य ज्ञान देकर देश को सोने की चिड़ियाँ की उपमा दिलाई है । वनस्पति विशेषज्ञ झाला किरत सिंह (मोरबी-पीपलीं) किसी व्यक्ति के पास इस कन्द के विषय में अधिक जानकारी और साहित्य – प्रयोग हो तो संपर्क करने की विनम्र प्रार्थना है । मो. ९८२४१६०६६९ ई-मेल- zalakiratsinh@yahoo.com
तेलीया कंद के उपयोगः- तेलीया कंद जहरी औषधि है उसका उपयोग सावधानी पुर्वक करना, संघिवा, फोडा, जख्म दाद, भयंकर, चर्मरोग, रतवा, कंठमाल, पीडा शामक गर्भनिरोधक गर्भस्थापक शुक्रोत्पादक, शुक्रस्थंभक, धनुर अपस्मार, सर्पविष, जलोदर कफ, क्षय, श्वास खासी, किसी भी प्रकार का के´शर, पेटशुल आचकी, अस्थिभंग मसा, किल, कृमी तेलीया कंद इन तमाम बीमारीयो मे रामबाण जैसा कार्य करता है, और उसका अर्क जंतुध्न केल्शीयम कि खामी, स्वाद कडवा, स्वेदध्न सोथहर और स्फुर्ति दायक हैं तेलीया कंद को कोयले मे जला के उसकी राख को द्याव, चर्मरोग, किल वगेरे बिमारीओ मे काम करता है । अन्न नली कि सुजन मे इसके बीज को निमक के साथ मिलाकर सेवन करना, इके फूल पीले सफेद ओर खुशबु दार होते है ।
सावधानीयाः- तेलीया कंद एक जहरी-औषधी है इस लीये उसका उपयोग सावधानी पूर्वक करना, तेलीया कंद के भीतर तीन प्रकार के जहरी रसायन होते है .... जो ज्यादा मात्रा मे लेने से गले मे सुजन आना, चककर, किडनी का फेल होना या ज्यादा मात्रा मे लेने से मृत्यु तक हो सकती है इसलिए इसका पुराने कंद का हि उपयोग करना यातो कंद को रातभर पानी मे भीगोने से या पानी मे नमक डाल के ऊबालने से उसका जहर निकल जाता है ।

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